उत्तर प्रदेश राज्य राष्ट्रीय

बिजनौर के फीना,धामपुर और बुडगरा में अगस्त क्रांति दिवस मनाने की हुई शुरुआत

August Revolution day celebration began in Bijnour
August Revolution day celebration began in Bijnour

Bharatvani Samachar(Agency) :16 अगस्त 1942 को बिजनौर जनपद के नूरपुर थाना पर सेनानियों ने तिरंगा लगाने का प्रण किया था। अंग्रेज सरकार को यह मंजूर न था। 16 अगस्त को अपना प्रण पूरा करने के लिये आसपास के पचासों गाँव के लगभग 15000 लोग थाने पर पहुँच गये। तिरंगा लेकर थाने में प्रवेश करते समय गुनियाखेड़ी के परवीन सिंह और तिरंगे को लगाने के प्रयास में अस्करीपुर के रिक्खी सिंह पुलिस की गोली का शिकार हुए। दोनों शहीद हो गये थे। अनेक सेनानी लाठीचार्ज से घायल हुए। इस घटना से क्रुद्ध सरकार ने सेनानियों, उनके परिवार जन, आसपास रहने वालों, शुभचिंतकों और रिश्तेदारों को अनगिनत यातनाएँ दी। अनेक परिवार तबाह हो गये। 17-18 अगस्त 1942 की रात खेतों में अज्ञातवास के दौरान फीना के बलकरन सिंह और परवीन सिंह का तेज बुखार से निधन हो गया।
सुनहरा अध्याय लिखने के बावजूद इस घटना के ज्यादातर सेनानी गुमनाम ही रह गये। शहीदों की स्मृति में नूरपूर में 16 अगस्त को मेला लगता है। विगत समय से देखने में आया है कि लोगों की रुचि मेले में तेजी से घट रही है। इन सेनानायों के व्यक्तित्व और कृतित्व को अगली पीढ़ी तक ले जाने के लिये इस वर्ष 16 अगस्त को ग्राम फीना, धामपुर शहर और बुडगरा में नयी पहल करते हुऐ अगस्त क्रांति दिवस मनाया गया। इस मौके पर गोष्ठी कर नूरपुर तिरंगा आंदोलन के अमर शहीदों और सभी सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। ग्राम फीना में हरीश कुमार चौहान द्वारा, धामपुर में नरेश वत्स द्वारा, बुडगरा में पूर्व प्रधानाचार्य सोमेश्वर सिंह द्वारा यह कार्यक्रम अपने अपने क्षेत्रों में पहली बार आयोजित कराया गया। फीना में इस कार्यक्रम के अंतर्गत अनेक ने अपने घरों में पाँच-पाँच दीपक जलाए तथा ऑन लाइन गोष्ठी के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की। नूरपुर के अमर शहीदों पर समाचार वाणी भारत की खबर पढ़ कर्वी चित्रकूट की 10 वर्षीय इच्छान्शी ने परवीन सिंह और रिक्खी सिंह का चित्र बनाकर भेजा। क्षेत्रीय इतिहास संकलन अभियान जनपद बिजनौर की अपील पर नयी पहल के लिये इसके संचालक हेमन्त कुमार ने
सबको साधुवाद देते हुए इसे प्रति वर्ष मनाने की बात कही। उन्होंने फीना की ऑन लाइन गोष्ठी में भी भाग लिया और सेनानियों का परिचय देते हुए शोधपूर्ण इतिहास प्रस्तुत किया। शेखवात संस्थान मोरना ने भी स्व-प्रेरणा से एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित कर नूरपुर के शहीदों और क्रांतिकारियों को याद किया।

About the author

Editor@Admin

आज कल के कॉर्पोरेट कल्चर के इस दौर में हर बात ख़ास की कही जा रही है और हर बात खास की सुनी जा रही है। भारत वाणी समाचार एक जरिया बनना चाहता है जिसमें हर आम इंसान अपनी कह भी सके और अपनी सुना भी सके। यहाँ पर हर एक का एक कोना है जिसे जो कहना है कहे और जिसे जो भी सुनाना है सुनाए शर्त बस इतनी है की मर्यादाओं का संयमपूर्वक पालन किया जाये। पर ध्यान रखें की खबरें तथ्यों पर आधारित ही रहे।

Add Comment

Click here to post a comment

Live TV

Weather Forecast

Facebook Like

Advertisement1

जॉब करियर

Advertisements2