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बिना आरक्षण लखनऊ विश्विद्यालय में हो रहीं भर्तियों को लेकर बसपा विधायक डॉ. हरगोविंद भार्गव ने गवर्नर को लिखा पत्र

आयोग के समक्ष पक्ष रखने से पहले ही एलयू प्रशासन ने शुरू कर दी चयन प्रक्रिया  
लखनऊ विश्विद्यालय के विभिन्न विभागों में लगभग 250 पदों पर अतिथि प्रवक्ता व विषय विशेषज्ञ की प्रस्तावित भर्ती पर सवालिया निशान खड़े होने शुरू हो गए हैं। इस सम्बन्ध में सिधौली से बसपा विधायक एवं विधान मंडल दल के सचेतक डॉ. हरगोविंद भार्गव ने गवर्नर को पत्र लिखा है। पत्र के माध्यम से उन्होंने लखनऊ विश्विद्यालय प्रशासन पर आरोप लगते हुए लिखा है कि उक्त शिक्षकों की नियुक्ति के लिए नियमानुसार विज्ञापन जारी  नहीं किया गया है। जिससे सभी योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर नहीं प्राप्त होगा। इसके साथ ही उन्होंने लिखा है कि भर्ती में आरक्षण का प्रावधान नहीं किया है, जिस वजह से यह पूरी भर्ती असंवैधानिक है। शिक्षकों की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार की आरक्षण नियमावली का पालन किया जाना चाहिए। भर्ती में आरक्षण की व्यवस्था न किये जाने से एससी- एसटी- ओबीसी तथा सामान्य वर्ग के आर्थिक  रूप से पिछड़े अभ्यर्थियों का अहित होगा। उन्होंने पत्र क माध्यम से आरोप लगाया है कि यूजीसी की चयन प्रक्रिया के नियामनुसार चयन समिति में एक ओबीसी, एक एससी, एक एसटी सदस्य रखा जाना अनिवार्य है मगर कुलसचिव द्वारा जारी चयन समिति में इस प्रावधान को तर्जी नहीं दी गई है।
आयोग के समक्ष पेश होने से पहले ही शुरू कर दी चयन प्रक्रिया, इस पूरी भर्ती प्रक्रिया के सम्बन्ध में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा और कुलसचिव, लखनऊ विश्विद्यालय को आज आयोग के समक्ष पेश होकर पूरे मामले से सम्बंधित साक्ष्यों को पेश करने का नोटिस जारी किया है। मगर उससे पहले ही सोमवार को शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया है जिसको लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों में काफी रोष व्याप्त है।
बिना विज्ञापन निकाले ही नियुक्ति निकालने के भी लग रहे आरोप  इस पूरी शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को देखकर ही बड़े खेल का एहसास हो रहा है। पहले तो 250 पदों के लिए बिना विज्ञापन के ही आनन-फानन में चोरी-छिपे भर्ती निकाली गई जो खुद में बड़े सवाल खड़े कर रही है तो वहीं इसकी भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है कि अतिथि प्रवक्ता और विषय विशेषज्ञ के लिए 250 में कितनी-कितनी सीटें रहेंगी। यहाँ तक की मानदेय भी सार्वजनिक रूप से बताया नहीं गया है। ऐसे में पूरी चयन प्रक्रिया को मनमानी घोषित अगर की जाये तो गलत नहीं होगा।
अतिथि प्रवक्ता व विषय विशेषज्ञ में पदों को लेकर मतभेद, अतिथि प्रवक्ता एवं विषय विशेषज्ञ दोनों ही अलग-अलग प्रकार के पद हैं। दोनों की योग्यताएं अलग-अलग होती हैं। अतः यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि किसी पाठ्यक्रम विशेष में कितने पद विषय विशेषज्ञ के हैं और कितने अतिथि प्रवक्ता के। विषय विशेषज्ञ को नियुक्त करने की आवश्यकता नहीं होती है वह एक या दो  व्याख्यान के लिए आवश्यकता अनुसार आमंत्रित किया जाता है ना कि पूरे कोर्स को पढ़ाने के लिए। यूजीसी रेगुलेशन 2018 के अनुसार किसी भी प्रकार के शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया वही होगी जोकि नियमित शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया है। मगर इस चयन प्रक्रिया में इसका भी अनुपालन नहीं किया जा रहा है।

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