उत्तर प्रदेश राज्य राष्ट्रीय

बी.एच.यू बना जातिवादी अड्डा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने लिया संज्ञान माँगा जवाब

BHU becomes caste based discrimination national hub National OBC Commission considers matter and issued explanation notice to university administration
BHU becomes caste based discrimination national hub National OBC Commission considers matter and issued explanation notice to university administration

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने बीएचयू BHU से मांगा 2007 से 2020 तक का रिजर्वेशन रोस्टर, NFS अभ्यर्थियों की संख्या तथा इंटरव्यू में बुलाये गये विषयेतर एक्सपर्ट की जानकारी।

Bharatvani Samachar(Agency):काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) BHU वाराणसी देश का केन्द्रीय विश्वविद्यालय है यहाँ नियुक्ति प्रक्रिया में लम्बे अरसे से अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों को सुनियोजित तरीके से इंटरव्यू में अयोग्य घोषित करके उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। यहाँ के शिक्षकों ने इस षड्यंत्र का समय-समय पर विरोध करने के साथ ही न्याय की मांग करते रहे हैं लेकिन अभी तक जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कोई उचित कार्यवाही नहीं होने के कारण आज भी इस केन्द्रीय विश्वविद्यालय BHU में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर एवं असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर योग्य अभ्यर्थियों की भरमार होने के बावजूद भी उन्हें इंटरव्यू में अयोग्य ठहराया जा रहा है।

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वर्तमान BHU कुलपति के कार्यकाल में संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान, आयुर्वेद, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, दृश्य कला संकाय आदि के विभिन्न विभागों के साथ ही अर्थशास्त्र, कला इतिहास, हिन्दी, दर्शनशास्त्र, रसायन विज्ञान विभागों में बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति, जनजाति व अन्य पिछड़े वर्ग के योग्य अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में बुलाकर सुनियोजित तरीके से अयोग्य घोषित किया गया है।
यह सुनियोजित साजिश किस तरह से की जा रही है इसे हम दर्शनशास्त्र विभाग के उदाहरण से समझ सकते हैं। इस विभाग में शार्टलिस्टिंग में 42 उम्मीदवार योग्य पाये गये ( Eligible candidates) और इंटरव्यू के लिए 12 अभ्यर्थियों को बुलाया गया किन्तु दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से सभी को “चयन के लिये अनुपयुक्त” (NFS) घोषित कर दिया गया। इसी तरह से चिकित्सा विज्ञान संस्थान के एनेस्थीसिया विभाग में वंचित वर्गों के लिये आरक्षित सभी पाँच पदों के अभ्यर्थियों को अयोग्य ठहराया गया जबकि अभ्यर्थी बीएचयू के ही पासआउट थे। बीएचयू के अन्य विभागों में भी इसी तरह से किया गया।

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संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान में जिस अभ्यर्थी को चयन के अयोग्य ठहराया गया वह उसी संकाय का गोल्ड मेडलिस्ट है और वहां पर पाँच साल से उसी विभाग में शिक्षण कार्य कर रहा था। इससे साफ जाहिर होता है कि बीएचयू में अनुसूचित जाति, जनजाति अन्य पिछडेवर्ग के लोगों को सुनियोजित तरीके से चयन से रोका जा रहा है।

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