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कोविड निर्देशों के बीच बी एच यू में मना भारत की प्रथम शिक्षिका का 190 वाँ जन्मदिवस

Savitri Bai Fule 190th birth anniversary was celebrated in BHU
Savitri Bai Fule 190th birth anniversary was celebrated in BHU

Bharatvani Samachar (Agency): अनुसूचित जाति, जनजाति छात्र कार्यक्रम आयोजन समिति बीएचयू और ओबीसी एससी एसटी एमटी संघर्ष समिति बीएचयू के छात्र छात्राओं द्वारा कोविड-19 के निर्देशों का पालन करते हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो. एच एन त्रिपाठी सभागार में 3 जनवरी 2021 को भारत की प्रथम शिक्षिका माता सावित्री बाई फुले Savitri Bai Fule का 190 वाँ जन्मदिवस मनाया गया। सर्वप्रथम प्रोफेसर महेश प्रसाद अहिरवार (प्राचीन इतिहास) और प्रोफेसर लालचन्द सर(कृषि वैज्ञानिक) ने कार्यक्रम की शुरुआत माता सावित्री बाई फुले,बाबा साहब डाक्टर भीम राव अम्बेडकर,और ज्योतिराव फुले के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलित कर किया। Savitri Bai Fule

इस कड़ी में दर्शन शास्त्र विभाग के प्रोफेसर प्रमोद कुमार बागड़े सर ने कहा माता सावित्री बाई फुले  Savitri Bai Fule एक संघर्ष शील महिला थीं ।बागड़े सर ने आगे कहा ब्राह्मणवादी और साहूकार दो लोग ज्योतिराव फुले की दृष्टि में समाज के शोषक थे।मुख्य वक्ता प्राचीन इतिहास विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर सुजाता गौतम ने कहा माता सावित्री बाई फुले जब बच्चों को,विधवाओं को पढ़ाने के लिए जाती थीं तो उन्हें गोबर और पत्थर से मारे जाते थे पर उन्होंने कभी हार नही मानी चुनौतियों का डटकर सामना किया और 1848 में प्रथम बालिका विद्यालय खोलने का काम किया ।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से आये बतौर विशिष्ट अतिथि असिस्टेंट प्रोफ़ेसर अमरजीत सर ने कहा कि दलितों के ऊपर सदियों से उत्पीड़न होते आया है उदाहरण देते हुए सर ने कहा बिहार में दलितों को जिन्दा जला दिया गया था जिसे कविता के रूप में नागार्जुन ने लिपिबद्ध भी किया था।प्रोफेसर लालचन्द सर ने ने भी भारतीय वर्ण व्यवस्था में नारी जाति की अस्मिता पर विस्तृत प्रकाश डाला जिसमें उन्होंने कहा कि आज के माता- पिता बेटी को लेकर इसलिए चिन्तित होते हैं क्योंकि आज समाज का कोई भी व्यक्ति पीड़ित पक्ष की तरफ नही होता है छेड़छाड़ जैसी घटनाओं पर लड़के तमाशबीन नजर आते हैं ।प्रोफेसर महेश प्रसाद अहिरवार सर ने कहा जितना ज्यादा ज्यादा हो सके हम समाज को संगठित करने की पहल करें इसी से समाज और राष्ट्र का विकास होगा क्योंकि हमारी बौद्ध परम्परा में समता और भाईचारे का संदेश है।

बुद्ध,कबीर और ज्योतिराव फुले को बाबा साहब अपना गुरु मानते थे।छात्रों में कार्यक्रम्र का संचालन कर रहे विवेकानंद, रामधीरज अम्बेडकर,चांदनी आदि ने भी अपने विचार रखे कार्यक्रम में महामंत्री महेश कुमार, सूर्यमणि गौतम,अजीत कुमार ,अंकित ,अमन, विवेक ,पवन , चंद्रभान , चाँदनी आदि छात्र-छात्रा मौजूद रहे।

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