उत्तर प्रदेश राज्य राष्ट्रीय

सरकारी उपक्रमों को मजबूर नहीं मजबूत करे सरकार : विजय कुमार बंधु

Atewa President - Vijay Kumar Bandhu
  • ऑर्डनैंस फैक्ट्री का शानदार इतिहास २हा है।
  • निगमीकरण /निजीकरण देश हित में नहीं
  • हर व्यक्ति अपने भविष्य को लेकर सशंकित रहेगा तो भारत कैसे आत्मनिर्भर होगा
  • तीनों ट्रेड यूनियन के संयुक्त प्रयास का NMOPS समर्थन और स्वागत करता हैं।

200 वर्षों से भी अधिक आयुध निर्माणी फैक्ट्रियों का शानदार इतिहास रहा है
1801 काशीपुर कोलकाता से शुरू हुए सफर पर ब्रेक लगाने तैयारी किसी दृष्टिकोण से सही नही है । रक्षा उत्पादान ईकाइयो को 1948 में हो रक्षा मंत्रालय के आधीन क२ लिया गया था । 2 अप्रैल 1979 में आयुध निर्माणी बोर्ड अस्तित्व मे आ गया था ।आज जब हर तरह से अपनी सेनाओं के लिए प्रतिवर्ष बेहतरीन सेवाए दे २हे है हम सभी के आँखो के सामने कारगिल युद्ध मे अपनी श्रेष्ठ योगदान देने वाले यहा के कर्मचारियो ने उत्तम कार्य किये । देश की आजादी के पहले 18 ऑर्डनैंस फैक्ट्री काम कर रही हैं आजादी के बाद अब यह संख्या 41 हो गई , कई प्रशिक्षण संस्थान, क्षेत्रीय विपणन केंद्र स्थापित है देश की तीनों सेनाओं जल ,थल ,और वायु के लिए पिस्तौल /रिवाल्वर कारतूस, गोला बारूद ,विस्फोटक रसायन, सैन्य वाहन ,पैराशूट ,कवचयुक्त वाहन आदि निर्माण कार्य का शानदार कार्य किया हो। देश की रक्षा में जिनका अनुकरणीय योगदान रहा हो । सरकारी उपक्रमो मे एक ऑर्डनैंस निर्माणी फैक्ट्रियां लगातार अपनी अच्छी सेवाए दे २ही है । पता नहीं सरकार को क्या सूझा ऑर्डनैंस फैक्ट्रियों का निगमीकरण का फैसला ले लिया। (जबकि अगस्त 2019 को रक्षा मंत्रालय का स्पष्ट बयान था कि ऐस कुछ नही किया जायेगा ) ।

मुझे पता नहीं कि निगमीकरण से सरकार का क्या लाभ होगा परंतु रक्षा के क्षेत्र में इस तरह का निर्णय से देश की सुरक्षा उसकी अस्मिता के लिए निश्चित रूप से ठीक नही है। 82,000से ज्यादा कर्मचारी उनके परिवार का क्या होगा ?? इसमें से 44000 से ज्यादा कर्मचारी NPS के दायरे में आते हैं जिनको पहले से ही बुढ़ापे की लाठी से वंचित कर दिया गया है । यू कहे फि कर्मचारियो का निगमीकरण तो NPS के रुप मे पहले ही कर चुकी है वो आत्मनिर्भर कैसे हो पायेगे सरकार यह तो बताए ? अकेले जबलपुर ऑर्डनैंस फैक्ट्री में 3२,000 से ज्यादा कर्मचारी है इन सभी हजारो हजारो कर्मचारियो का भविष्य आगे क्या होगा ?? कैसे इनका परिवार चलेगा। सरकार #वेलफेयर के लिए होती है ना कि बिजनेस के लिए होती है । दुर्भाग्य है इस समय सरकारें वेलफेयर को भूलकर एक बिजनेसमैन की तरह व्यवहार कर रही हैं जो भारतीय लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। और हर कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर चिंतित रहे। देश का हर नागरिक अपने और अपने परिवार के लिए परेशान रहे कोई अच्छी बात नहीं। हां हो सकता है कि निगमीकरण के बाद बहुत से बडे व्यापरियो की नजर आयुध निर्माणी के साठ हजार एकड़ भूमि पर नजर हो जो किसी और बिजनेस को लेकर के लालायित हो। एक बात सभी लोग महसूस कर रहे होंगे यह दौर सरकारी उपक्रमों को प्राइवेट सेक्टर में डाला जा रहा है किसी का नंबर आज आया है किसी का नंबर कल आएगा । लेकिन जो दौर चल रहा है उसमें एक न एक दिन सबका नंबर आएगा । किसी ने बिलकुल सही कहा है कि –
जलते घर को देखने वालो ,पूस का छप्पर आपका है ।
आग के पीछे हैं हवाएं ,आगे मुकद्दर आपका है ।
उसके जुल्म पे मैं चुप था अब मेरी बारी आयी है ।
मेरे जुल्म पे आप भी चुप है
अगला नम्बर आपका है।

ऑर्डनैंस फैक्ट्री के खिलाफ कोई निर्णय हो य रेलवे के खिलाफ हो य अऱ्य विभागो के विरुद्ध हो , वक्त की मांग है सभी कर्मचारी सिर्फ कर्मचारी की नजर से उस मुद्दे को देखें और एकजुट होकर के इस निगमीकरण और निजीकरण का विरोध करें । क्या हमारे देश के स्वतंत्रा सेनानियों ने इसीलिए देश को आजादी दिलाई कि #ईस्ट इंडिया कंपनी से मुक्त होकर किसी और कंपनियों से चंगुल में आ जाएं ,क्रांतिकारियों की यह सोच तो बिल्कुल नहीं रही होगी ।

तो आइए सभी लोग मिलकर किसी भी विभाग में हो रहे निगमीकरण /निजीकरण पर विरोध दर्ज कराएं। एक-दूसरे के सहयोगी बने नहीं तो आने वाली पीढ़ियां हमसे आपसे भी सवाल करेंगी कि जब सरकारी उपक्रम बिक रहे थे तो आप क्या कर रहे थे ? शायद उस समय आपके पास इसका कोई जवाब नहीं होगा।
माननीय प्रधानमंत्री जी से तथा मा० रक्षामंत्री जी से निवेदन करता हूं सरकारी उपक्रमों को मजबूत करें मजबूर नही । और कोरोना जैसे महामारी के समय शिक्षकों ,कर्मचारियों ने अपनी क्षमता से अधिक ,अपनी जान हथेली पर लेकर मानवता की और देश की सेवा कर रहे हैं। ऐसे हालात में उन्हें प्रोत्साहन देने के बजाय उनके पैर पर कुल्हाड़ी मारी जा रही है जो किसी दशा मे ठीक नहीं है।

अच्छी बात यह है कि ऑर्डनैंस फैक्ट्री के निगमीकरण के खिलाफ तीनों ट्रेड यूनियन एक साथ हैं हम उनके इस कदम का स्वागत करते हैं और NMOPS उनके इस संयुक्त प्रयास का समर्थन करता हैं।

 

Writter-

विजय कुमार बन्धु
राष्ट्रीय अध्यक्ष
NMOPS

 

विजय कुमार बन्धु, अध्यक्ष, NMOPS

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