राजनीति राष्ट्रीय

साठ के दशक से बिल्कुल अलग है वर्तमान भारत

लेखक अपुल कुमार सिंह लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में परास्नातक हैं। साथ ही नेट की भी परीक्षा उत्तीर्ण की है। वे समसामयिक मामलों पर आर्टिकल लिखते रहते हैं।

कोरोना महामारी के संबंध में पूरी वैश्विक बिरादरी में आलोचना का पात्र बना चीन अब भी अपनी विस्तारवादी नीतियों से बाज नही आ रहा है।लगभग डेढ़ महीने की तनातनी के बाद खबर है कि अक्साई चिन इलाके की गैलवान घाटी में  4350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पेंगोंग झील के पास चीनी सेना से तनाव कम करने की प्रक्रिया(डी-एस्केलेशन) के दौरान हुई झड़प में भारतीय सेना के एक कमांडिंग अधिकारी सहित दो अन्य जवान हताहत हो गए, चीन के सरकारी अखबार ग्लोबलटाइम्स के हवाले से चीनी सेना के भी कई सैनिकों के हताहत व घायल होने की खबरें आयी हैं।भारतीय सेना ने जहां कहा है कि तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं वहीं चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के हवाले से भारत द्वारा पहले उग्र होने का आरोप लगाया गया है।चीनी विदेश मंत्रालय ने भारत को एकतरफा कार्यवाही न करने को कहा है। दरअसल भारत चीन का सीमा विवाद राजनैतिक के साथ ऐतिहासिक भी है जो वक्त वक्त पर हमे एक टीस देता रहता है। सीमा विवाद पचास के दशक से ही विद्यमान है और दोनों देश 1962 में इसीलिए एक युद्ध भी लड़ चुके हैं।

युद्ध के बाद वास्तविक सीमा रेखा के सम्मान की बात की गयी और बाद में कुछ छिटपुट घटनाओं यथा 11 सितम्बर 1967 को सिक्किम के नाथुला में हुई झड़प ,15 सितंबर 1967 को हुई झड़प व 2017 में 16 जून को ही हुए डोकलाम ट्राईजंक्शन में हुए विवाद के अलावा यहां शांति बरकरार रही है।जब कभी भी सेनाओं का आमना सामना हुआ भी तो सेनाओं ने धैर्य से काम लिया जिससे कोई भी बड़ी घटना टाली जा सकी।
भारत ने सीमा विवाद के हल के लिए वार्ता को प्रमुखता देते हुए दोनों देशो के बीच शीर्ष कूटनीतिक चैनल वार्ता को जारी रखा है। दोनों देशों ने सीमा प्रबंधन समितियों का भी गठन कर रखा है।भारत चीन लगभग साढ़े तीन हजार किलोमीटर लंबी अत्यंत दुर्गम सीमा साझा करते हैं।आजादी के बाद विभिन्न कारणों से भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा हेतु बेहतर बुनियादी ढांचे का निर्माण न कर सका जबकि चीन ने भारत से लगी सीमा तक सेना की पहुंच को सुगम बनाते हुए आधारभूत ढांचे पर व्यापक काम किया ,जिसमे हवाई पट्टी ,बैंकिंग सेवाएं,सामरिक सड़कें शामिल हैं।चीन द्वारा हड़पे जाने से पूर्व तक तिब्बत एक बफर स्टेट के रुप में भारत चीन के बीच उपस्थित था किन्तु 1950 में चीन द्वारा तिब्बत को हड़पे जाने से भारत की सीमाओं पर चीनी आक्रमण का खतरा मंडरा उठा ,चीनी विस्तारवादी नीति के कारण दोनों देशों में 1962 में घमासान युध्द हुआ।

चूंकि इस युध्द में चीन का उद्देश्य भारतीय सैन्य शक्ति ,राजनैतिक मनोबल को परास्त करना था ,अतः उसने बढ़ते वैश्विक दबाव में अपने कदम स्वयं पीछे खींच लिए।चीन ने सीमा पर आधारभूत बुनियादी ढांचे का विकास किया है जिससे कि वह किसी भी समय सीमा पर कोई भी गतिविधि करने में सक्षम है ।
अत्यंत दुर्गम भारत चीन सीमा पर चीन की नजर उन महत्वपूर्ण चोटियों ,सैनिक पोजीशनों पर है, जहां से वह निर्णायक भूमिका में रह सके।इन सामरिक महत्व की पोजीशन्स में अनेक पर्वतीय चोटियां ,नदियां व गलवान घाटी का क्षेत्र भी शामिल है।इस जगह का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह एक ऐसा ट्राईजंक्शन है जहां भारत-पाकिस्तान और चीन की सीमाएं हैं।चीन ने यहां ‘जी-219’नामक सड़क का निर्माण कर रखा है जिसका 179 किलोमीटर हिस्सा अक्साई चिन से होकर जाता है जो भारतीय क्षेत्र है।चीन यथासंभव जी-219 सड़क जो चीन के शिनजियांग प्रान्त से तिब्बत तक जाती है।यहां उसकी कई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं ।चीन इस राजमार्ग को यथासंभव भारत की नजर से दूर रखना चाहता है;क्योंकि यही पर पाकिस्तान के साथ उसकी महत्वाकांक्षी परियोजना सीपीईसी चल रही है। इधर बदलते परिदृश्य में भारत ने जब अपनी सीमाओं को मजबूत करना शुरु कर बुनियादी ढांचे की दिशा में काम करना प्रारंभ किया तो चीन छटपटा उठा।

पचास के दशक के एक समझौते का हवाला देते हुए उसने किसी भी निर्माण कार्य को लेकर चेतावनी दी ,किन्तु चीन यहां भूल गया कि उसने अपनी तरफ पहले से समस्त आधारभूत ढांचे का विकास कर रखा है और यह चाहता है कि भारत अपने भी क्षेत्र में कोई विकास न करे।
इधर पिछले कुछ वर्षों में भारत ने सीमा क्षेत्रों में अपने संगठनों यथा सीमा सड़क संगठन के प्रभावी कार्यक्रमो के माध्यम से सराहनीय कार्य करते हुए सीमाओं के अंतिम छोर तक अपनी त्वरित पहुंच को व्यापक बनाया है।इसी क्रम में पश्चिमी सेक्टर के महत्व के दृष्टिगत वास्तविक नियंत्रण रेखा के लगभग साथ साथ चलने वाली मौत की नदी के नाम से कुख्यात श्योक नदी के साथ डीएस-डीबीओ(दरबुक,श्योक गांव-दौलत बेग ओल्डी)सड़क का निर्माण कर लिया है जिससे भारत की यहाँ पहुंच सुगम होने के साथ साथ हर समय के लिए हो गयी है क्योकि पहले रास्ता बहुत दुष्कर होने के साथ अधिकांशतः बाधित हो जाता था।बी आर ओ द्वारा इससे निकाली जा रही फीडर सड़क भी तनाव का अहम कारण है।भारत की पहुंच अब काराकोरम तक सीधी हो जा रही है जो चीन बर्दाश्त नही कर पा रहा है। लद्दाख के केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने को चीन ने पसंद नही किया था।लद्दाख के केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद वहां हो रहे आधारभूत विकास को चीन अपने लिए खतरा समझ रहा है।
वास्तविक नियंत्रण रेखा(एल.ए.सी.)गैलवान घाटी स्थित झील ,नदियों के बीच में भी है अर्थात यहां दोनों सेनाओं का आमना सामना हो जाता है,चूंकि गैलवान घाटी में भारतीय सेना की उपस्थिति से चीन यहां अपनी पोजीशन्स को खतरा महसूस करता है। विस्तारवाद का  प्रबल आकांक्षी वैश्विक अगुवा बनने की हसरत पाले हुए है जिसमें वह भारत को अपना प्रबल प्रतिद्वंद्वी महसूस करता क्योंकि कोरोना महामारी के प्रसार के बाद सही समय पर सही जानकारी न देने के संदेह में  सम्पूर्ण वैश्विक जगत में चीन आलोचनाओं से घिरा हुआ है।संयुक्त राज्य अमेरिका ,ऑस्ट्रेलिया आदि देशों ने चीन पर खुलकर आरोप लगाए हैं।वैश्विक जगत में अपनी इस आलोचना और भारत के बढ़ते वर्चस्व से चीन बौखलाया हुआ है और वर्तमान तनाव उसी का परिचायक है।
भारत द्वारा लद्दाख सीमा पर पीछे न हटने व सीमा पर रणनीतिक रुप से महत्वपूर्ण सड़क निर्माण से चीन  विचलित हो उठा है।अतः यह भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है ,जो वह पहले भी करता आया है। राजनैतिक ,सैनिक मनोबल की थाह लेने के बाद अपने पांव खींच लेने की चीन की पुरानी आदत है।वर्तमान घटनाओं पर उसकी प्रतिक्रिया इसी ओर इशारा करती हैं जैसा कि उसके सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भी भारत द्वारा  एकतरफा कार्यवाही न करने की चेतावनी दी है और उसके विदेश मंत्री बातचीत से मामले को सुलझा लेने की बात कर रहे हैं।वर्तमान वैश्विक परिस्थितियोंमें भारत आज चीन से मोलतोल करने की स्थिति में है अतः उसे इस समय सेना की बातचीत प्रक्रिया व सरकारी कूटनीतिक चैनल वार्ता जारी रखते हुए सीमा विवाद समाधान की दिशा में आगे बढ़ना होगा।हमे आशा करते हैं कि सरकार विवाद का समाधान करते हुए राष्ट्रीय गौरव ,सीमा सुरक्षा के साथ कोई शिथिलता नही बरतेगी,क्योंकि चीन को देर सबेर यह बात मालूम ही पड़ जानी चाहिए कि वर्तमान भारत साठ के दशक का भारत नही है।वर्तमान भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा हेतु किसी भी क्रिया की प्रबल प्रतिक्रिया देने में पर्याप्त सक्षम है।

About the author

Editor@Admin

आज कल के कॉर्पोरेट कल्चर के इस दौर में हर बात ख़ास की कही जा रही है और हर बात खास की सुनी जा रही है। भारत वाणी समाचार एक जरिया बनना चाहता है जिसमें हर आम इंसान अपनी कह भी सके और अपनी सुना भी सके। यहाँ पर हर एक का एक कोना है जिसे जो कहना है कहे और जिसे जो भी सुनाना है सुनाए शर्त बस इतनी है की मर्यादाओं का संयमपूर्वक पालन किया जाये। पर ध्यान रखें की खबरें तथ्यों पर आधारित ही रहे।

Add Comment

Click here to post a comment

Live TV

Weather Forecast

Facebook Like

Advertisement1

जॉब करियर

Advertisements2