राजनीति

योगी सरकार के तीन साल, बेमिसाल

नवनीत कुमार जायसवाल

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-सपा गठबंधन को सीधे टक्कर देते हुए भाजपा ने कुछ क्षेत्रीय दलों के साथ 325 सीटें जीती थी, तो पूरे प्रदेश के कार्यकर्तााओं में खुशी की लहर दौड़ गई। हलांकि इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन के साथ भाजपा ने 80 में से 73 सीटों पर कब्जा जमाया था। विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से नेताओं ने मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने की जुगत भिड़ानी शुरू कर दी। इस बीच दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसके बाद गोरखपुर के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ को एक संदेश भिजवाया गया और तत्काल दिल्ली बुलाया गया। सभी संभावनाओं को विराम देते हुए 21 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश के मुखिया के रूप में योगी की ताजपोशी कर दी गई। आने वाले 18 मार्च को उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार अपने तीन साल पूरे कर रही है। इसी के साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम प्रदेश में भाजपा के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर असीन रहने का रिकॉर्ड दर्ज होने जा रहा है।

यूं कहें तो, बिना किसी प्रशासनिक अनुभव के बावजूद योगी आदित्यनाथ ने कानून व्यवस्था व निवेश पर विशेष ध्यान देने के साथ ही किसानों की ऋणमाफी व उपज की खरीद

फरोख्त के मामलों को जिस तरह सुलझाया है वह काबिले तारीफ है।

योगी अपने कार्यकाल के तीन साल 18 मार्च 2020 को पूरा करेंगे। वह 19 मार्च 2017 को मुख्यमंत्री बने थे। इससे पहले यूपी में भाजपा के जो भी मुख्यमंत्री बने, वह अपना पांच साल पूरा नहीं कर सके। इससे पहले कल्याण सिंह बीजेपी की सरकार में 24 जून 1991 से 6 दिसंबर 1992 तक मुख्यमंत्री रहे थे लेकिन अयोध्या विवाद के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। यूपी के बीजेपी के मुख्यमंत्रियों में सीएम योगी का अब तक सबसे लंबा कार्यकाल हो जाएगा। ऐसे में पार्टी 2022 के चुनाव को लेकर माहौल बनाने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहती। इसलिए सीएम योगी के 3 साल के कार्यकाल को सुशासन और विकास के मॉडल के तौर पर जनता में पेश करने की तैयारी की जा रही है।

सीएम योगी ने मंत्रियों के साथ विधायकों से भी मांगा रिपोर्ट कार्ड

योगी सरकार के 3 साल का कार्यकाल पूरा करने पर यह प्रयास है कि पार्टी और सरकार दोनों इसका फायदा आगामी चुनावी साल में उठा सकें। इसे लेकर कमर कस ली गई है। सबसे ज्यादा फोकस 3 साल की उपलब्ध्यिों से संबंधित किताब पर है। इस बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार के मंत्रियों के साथ-साथ विधायकों को भी रिपोर्ट कार्ड सौंपने के निर्देश दिये हैं।

योगी आदित्यनाथ ने अपने कार्यकाल में अपनी छवि सख्त मुख्यमंत्री के तौर पर बनाई है। करप्शन पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए अधिकारियों पर कार्रवाई हो या फिर जिलों का दौरा करके विकास की जमीनी हकीकत जानने का प्रयास, मुख्यमंत्री ने कई रिकॉर्ड कायम किये हैं। तीन साल पूरा होने पर भी मुख्यमंत्री ने जवाबदेही तय करने का सिलसिला शुरू कर दिया है और इसी कड़ी में सरकार के मंत्रियों के साथ विधायकों को भी कामकाज का रिपोर्ट कार्ड सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि सीएम योगी खुद विकास योजनाओं का हाल जानने 19 मार्च से जिलों के दौरे के लिए निकलने वाले हैं और वह विकास की योजनाओं को अधिकारियों की बातों पर यकीन न करते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना समेत विभिन्नि योजनाओं को लेकर खुद जिलों का हाल जानेंगे। योगी के दौरों को लेकर सरकार से संगठन स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। जहां एक तरफ जिले के अधिकारी योगी के दौरों के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाते नजर आ रहे हैं, वहीं इस बाबत विधायकों को भी अपने कामकाज की रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है।

योगी जल्द कर देंगे बुकलेट फाइनल

उपलब्धियों से संबंधित किताब (बुकलेट) का फॉर्मेट अब तक कई बार सीएम योगी देख चुके हैं और किताब को लेकर भी लगातार सोशल मीडिया के जरिये जनता से ही राय ली जा रही है। हालांकि इस पर भी अंतिम मुहर सीएम योगी जल्द ही लगा देंगे। जिसके बाद बड़े पैमाने पर किताबों की छपाई का काम शुरू हो जायेगा। इतना ही नही इस मौके पर राजधानी में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में केंद्र के कई बड़े चेहरों के शामिल होने की उम्मीद जतायी जा रही है।

कार्यक्रम में बीजेपी अध्यक्ष भी होंगे शामिल

जानकारी के अनुसार सीएम योगी ने दिल्ली दौरे के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को 18 मार्च के दिन होने वाले कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया है, जिसे पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने स्वीकार भी कर लिया है। यानी यूपी सरकार के 3 साल पूरा होने पर सरकार से लेकर संगठन तक सभी कमर कसकर जुटेंगे।

सांसद और विधायक को प्रचार का सौंप जिम्मा

बीजेपी ने उत्तर प्रदेश सरकार के तीन साल पूरे होने पर गांव-गांव तक सरकार की उपलब्धियों का प्रचार करने का जिम्मा अपने सांसदों और विधायकों को दिया है। इस दौरान सांसद-विधायक पांच-पांच गांवों में जाकर सरकार की उपलब्धियां गिनाएंगे। प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ला ने बताया कि योगी सरकार के तीन वर्ष पूरे होने पर प्रमुख पदाधिकारियों के अलावा सभी विधायकों व सांसदों को अभियान में दायित्व सौंपे गए हैं। सांसदों और विधायकों को पांच-पांच गांव सौंपे गए हैं, जिनमें वह ग्राम चौपालों में केंद्र व प्रदेश सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित लोगों की विस्तृत जानकारी देंगे। मंत्री सिद्धार्थ नाथ ने कहा है कि सरकार पारदर्शिता के साथ जनता के बीच रहना चाहती हैं इसलिए जनता को जनप्रतिनिधि के बारे में जानने का हक है।

योगी सरकार की उपलब्धियां

पिछले 3 साल में योगी सरकार ने कई विकास कार्यों पर जोर देने की कोशिश की है। उन्होंने इन्वेस्टर समिट व डिफेंस समिट के माध्यम से राज्य को देश के मानसपटल पर एक सशक्त राज्य के रूप में स्थापित करने की कोशिश की है। इन्वेस्टर समिट के माध्यम से उन जिलों में उद्योग लगवाने की कोशिश की है जहां के लोग अन्य राज्यों में जाकर काम करने को मजबूर हैं। इससे क्षेत्रीय लोगों में एक उम्मीद की किरण दिखी है जो परिवार से दूर जाकर नौकरी करने को मजबूर हैं। इसके अलावा एक जिला एक उत्पाद के माध्यम से जिले के उत्पादों को बढ़ावा देने की कोशिश की है। इससे कुटीर उद्योगों को भी लाभ मिलेगा वो अपने उत्पादों को अन्य जिलों में जाकर अपने जिले को एक नई पहचान दे सकेंगे।

86 लाख किसानों  के कर्ज माफ

जब प्रदेश में किसान आत्महत्या कर रहे थे, तब योगी सरकार ने पहली कैबिनेट में किसान कर्ज माफी योजना की शुरुआत की थी, जिसके तहत 86 लाख किसानों के 1 लाख रुपये तक के कर्ज माफ किए गए। राज्य में 1 करोड़ 57 लाख किसानों को किसान सम्मान योजना का फायदा दिया गया। योगी सरकार ने किसान की आय दोगुनी करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र खोले और किसानों को उनके साथ जोड़कर लागत कम मुनाफा ज्यादा करने की योजना बनाई। पिछले साल योगी सरकार ने 73,000 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान किया है।

जापानी इंसेफ्लाइटिस पर रोक

योगी सरकार ने पूर्वी यूपी में जापानी इंसेफ्लाइटिस पर रोक लगाने का भरसक प्रयास किया है। 38 जिलों में दिमागी बुखार प्रभावी था जिसमें 65 फीसदी की कमी आई। राज्य में एक मेडिकल यूनिवर्सिटी, 2 एम्स और 15 नए मेडिकल कॉलेज बनाने की योजना चल रही है।

अपराध पर लगाम

योगी सरकार के राज्य में अपराध पर लगाम लगाने के प्रयास के कारण पिछले 3 सालों में दुर्दांत अपराधी राज्य छोड़कर चले गए हैं। डकैती की घटनाओं में 54 फीसदी की कमी आई है। हत्या के मामलों में 15 फीसदी और लूट की घटनाओं में 43 फीसदी की कमी आई है। जबकि अपहरण के मामलों में 30 फीसदी और बलवा की घटनाओं में 38 फीसदी की कमी आई है।

इन प्रमुख योजनाओं व कार्यक्रम का आंकड़ों के साथ होगा बखान

जघन्य अपराध, महिला अपराध, एससी-एसटी के विरुद्ध अपराध के मामलों में उल्लेखनीय कार्य, सफेदपोश अपराधी, भूमाफिया, खनन माफिया, शराब माफिया, पशु तस्कर के खिलाफ कार्रवाई, ऋणमाफी योजना, डीबीटी से भुगतान, पीएम किसान सम्मान निधि योजना, पीएम फसल बीमा योजना का लाभ, गन्ना मूल्य, धान-गेहूं, मक्का व बाजरा खरीद व भुगतान, धान, दलहन व तिलहन उत्पादन में वृद्धि, निराश्रित पशुओं का संरक्षण, पौधारोपण, विद्युतीकरण, उजाला योजना, नई सड़कों व पुलों का निर्माण, जेवर एयरपोर्ट, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गोरखपुर-आजमगढ़ लिंक एक्सप्रेस-वे, गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण, ई-टेंडर, ई-आॅफिस, ई-नाम, ई-डिस्ट्रिक्ट, जैम पोर्टल, ओडीओपी, स्टार्ट-अप इंडिया, माटीकला बोर्ड, अटल पेंशन, पीएम सुरक्षा, पीएम जीवन ज्योति ज्योति बीमा व पीएम जीवन प्रमाण पेंशन योजना।

इन योजनाओं का भी होगा जिक्र

उज्ज्वला योजना, शादी अनुदान, छात्रवृत्ति वितरण, महिला, वृद्धावस्था व दिव्यांगजन पेंशन, कन्या सुमंगला योजना, पीएम व सीएम आवास योजना, ग्रामीण आजीविका मिशन, मनरेगा, पीएम सड़क योजना, पेयजल योजना, नमामि गंगे, अमृत योजना, स्मार्ट सिटी योजना, कानपुर, आगरा, प्रयागराज, गोरखपुर व लखनऊ में मेट्रो परियोजना, आयुष्मान भारत, जननी सुरक्षा योजना, दवाओं, चिकित्सकों की उपलब्धता, एम्स, मेडिकल कॉलेजों व विश्वविद्यालयों की स्थापना।

कुंभ से वैश्विक स्तर पर मिली प्रसिद्धि

यूनेस्को की सूची में मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में शामिल प्रयागराज का कुंभ इस बार देश ही नहीं विदेशी मूल के संतों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना। इसकी सफलता के चर्चे देश नहीं विदेशों में भी हुए। कुंभ की इंटरनेशनल ब्रांडिंग हुई और इसके तहत 137 देशों को बुलाया गया था। विदेशी मेहमानों ने आकर भारतीय संस्कृति और सभ्यता को नजदीक से जाना।

नौकरी के खुले अवसर

इन्वेस्टर समिट के बाद राज्य में दो लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। इससे राज्य के युवाओं के लिए 20 लाख नौकरियों के अवसर खुले। माना जा रहा कि डिफेंस कॉरिडोर बनने से प्रदेश में बड़े पैमाने पर नौकरियां पैदा होंगी। यहां के युवाओं को दूसरे राज्य में नौकरी के लिए नहीं जाना पड़ेगा।

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